good morning
शुक्रवार, 17 नवंबर 2017
शुक्रवार, 28 जुलाई 2017
बैतूल कि वादियां
रविवार का दिन था मन मे अचानक ख्याल उठा क्यों ना आज का दिन बैतुल के साथ बिताया जाये । "बैतूल" मेरा मित्र है जिसे मै अक्सर मिलने जाया करता हुँ , बिना उसे बताये, बिना उससे पुछें। वो भी मुझसे ये शिकायत नही करता की बिना बताये क्युं आ गए। "बैतूल" से मिलने मुझको उसके अलग अलग जगहो पर स्थित घरो मे जाना होता है , हर बार घर अलग होता है क्योकिं मेरा मित्र नही चाहता की मैं उसके घर जाऊं और कुछ नया-सा ना लगे । "बैतुल" हर बार मुझसे तब ही बाते करता है जब मै उससे अकेले मिलने जाता हुँ। उससे मिलकर क्या बात होती है, मै आपको अपने अगले ब्लॉग मे बताऊँगा ।
लेखक :- बैतुल दिनेश पवार
रविवार का दिन था मन मे अचानक ख्याल उठा क्यों ना आज का दिन बैतुल के साथ बिताया जाये । "बैतूल" मेरा मित्र है जिसे मै अक्सर मिलने जाया करता हुँ , बिना उसे बताये, बिना उससे पुछें। वो भी मुझसे ये शिकायत नही करता की बिना बताये क्युं आ गए। "बैतूल" से मिलने मुझको उसके अलग अलग जगहो पर स्थित घरो मे जाना होता है , हर बार घर अलग होता है क्योकिं मेरा मित्र नही चाहता की मैं उसके घर जाऊं और कुछ नया-सा ना लगे । "बैतुल" हर बार मुझसे तब ही बाते करता है जब मै उससे अकेले मिलने जाता हुँ। उससे मिलकर क्या बात होती है, मै आपको अपने अगले ब्लॉग मे बताऊँगा ।
लेखक :- बैतुल दिनेश पवार
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