बैतूल कि वादियां
रविवार का दिन था मन मे अचानक ख्याल उठा क्यों ना आज का दिन बैतुल के साथ बिताया जाये । "बैतूल" मेरा मित्र है जिसे मै अक्सर मिलने जाया करता हुँ , बिना उसे बताये, बिना उससे पुछें। वो भी मुझसे ये शिकायत नही करता की बिना बताये क्युं आ गए। "बैतूल" से मिलने मुझको उसके अलग अलग जगहो पर स्थित घरो मे जाना होता है , हर बार घर अलग होता है क्योकिं मेरा मित्र नही चाहता की मैं उसके घर जाऊं और कुछ नया-सा ना लगे । "बैतुल" हर बार मुझसे तब ही बाते करता है जब मै उससे अकेले मिलने जाता हुँ। उससे मिलकर क्या बात होती है, मै आपको अपने अगले ब्लॉग मे बताऊँगा ।
लेखक :- बैतुल दिनेश पवार
रविवार का दिन था मन मे अचानक ख्याल उठा क्यों ना आज का दिन बैतुल के साथ बिताया जाये । "बैतूल" मेरा मित्र है जिसे मै अक्सर मिलने जाया करता हुँ , बिना उसे बताये, बिना उससे पुछें। वो भी मुझसे ये शिकायत नही करता की बिना बताये क्युं आ गए। "बैतूल" से मिलने मुझको उसके अलग अलग जगहो पर स्थित घरो मे जाना होता है , हर बार घर अलग होता है क्योकिं मेरा मित्र नही चाहता की मैं उसके घर जाऊं और कुछ नया-सा ना लगे । "बैतुल" हर बार मुझसे तब ही बाते करता है जब मै उससे अकेले मिलने जाता हुँ। उससे मिलकर क्या बात होती है, मै आपको अपने अगले ब्लॉग मे बताऊँगा ।
लेखक :- बैतुल दिनेश पवार
